Computer Fundamentals in Hindi

 इस Article में हम Computer Fundamentals in Hindi के बारे में जानेगे।  Computer Technology ने आज संपूर्ण विश्व को बदलकर रख दिया है।  आज Computer घरेलु काम से लेकर कंपनी, कारखानों आदि में हर जगह प्रयोग किया जाता है। इसी की वजह से ही कंपनी, कारखानों, दुकानों के काम आसानी से किये जाते है। 

Computer Fundamental के इस Chapter में सभी Computer के महत्त्वपूर्ण विषय शामिल है। Indian Government के द्वारा Conduct किये गए Computer Syllabus से Related जितने भी exam है। सभी में इसी Computer Fundamental से Question पूछे जाते है।  इस Computer Fundamental को पढ़ने के बाद आप उन सभी प्रश्न के उत्तर दे सकेंग।  


इसके अतिरिक्त BCA Entrance Exam, BCA Syllabus, B.Tech, CS Bsc में भी Computer Fundamental का ये syllabus होता है। इसमें आपको क्या-क्या पढ़ने को मिलेगा।  ये सब आप नीचे दी गयी Table में देख सकते है|

What is Computer

Computer शब्द की उत्पत्ति Latin भाषा के शब्द 'Compute' से हुई है।  जिसका अर्थ है ' गणना करना '  अर्थात Computer एक ऐसा electronic यन्त्र है।  जो गणना करने और संचालन को नियत्रित करने तथा उपयोगकर्ता के द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करता है।  ये Logical और Numerical दोनों term में काम करता है।  इसकी Memory, High Speed, Perfection के कारण ये millions जटिल गणनाये कुछ ही समय में कर देता है। 

History of Computer in Hindi

Computer का इतिहास बहुत वर्ष पुराना है।  जब मानव के पास गणना करने के लिए कोई भी यन्त्र मौजूद न था। उस समय व्यापारियों, मनुष्यो के लिए संख्या की गणना करना बहुत अधिक कठिन था।  

Abacus का अविष्कार

लगभग 5000 वर्ष पहले चीन में abacus नाम का एक यन्त्र का अविष्कार हुआ था।  इसकी सहायता से संख्याओं की गणना आसानी से की जा सकती थी।  
इसमें लकड़ी के इधर-उधर दो Frame होते थे। और बीच में बहुत से मोती पड़े होते थे।  इन मोतियों को इधर - उधर खिसकाकर  जोड़ा - घटाया जा सकता था। ये सबसे पहला यन्त्र था।   उसके बाद इस यन्त्र का उपयोग बहुत अधिक किया जाने लगा।  लेकिन इसमें भाग, गुणा और अन्य कोई भी गणना नहीं की जा सकती थी। इसलिए इसमें और अधिक विकास होने की आवश्यकता थी।  

Napier's Bones

Abacus के अविष्कार के बाद सन 1616 ई0 में सर जॉन नेपियर ने एक गणना उपकरण का अविष्कार किया।  जिसे napier 's bones कहा गया।  Napier 's Bones को Napier 's Rods भी कहा जाता है।  

इस उपकरण की सहायता से जोड़ (Addition),  घटना (Subtraction),  गुणा (Multiplication),  भाग (Division)  किया जा सकता था।  

यह Device आयताकार क्षण का एक set से बना था।  ऐसा मन जाता है।  की इसमें ग्यारह क्षण होती थी।  इसमें जो क्षणे लगी होती थी।  वो हाथी के दांत की होती थी।  इसलिए इसे Bones कहा जाता था।  सर जॉन एक प्रसिद्द स्कॉटिश वैज्ञानिक थे।  Computer के विकास में इनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। 

पास्कलाइन का अविष्कार 

Napier's Bones अविष्कार के बाद सन 1642 ई० में Blaise Pascal ने एक यन्त्र बनाया जिसे Pascaline के नाम से जाना जाता है।  इस यन्त्र की मदद से बहुत अधिक कठिन गणनाओ को आसानी से किया जाता है।  इसमें 8 पहिये लगे हुए थे तथा एक आयताकार Box शामिल था।  इसमें 10 , 100 , 1000 जोड़ा घटाया जा सकता था।  

Blaise Pascal एक mathematics थे।  उन्होंने math में बहुत सिद्धांत प्रस्तुत किये है।  उनके पिता को company के काम के लिए बहुत अधिक गणनाये करनी होती थी।  इसी काम को आसान बनाने के लिए उन्होंने इस Calculator को बनाया था।  

Charles Babbage 

ऐसा माना जाता है की Charles babbage ने Pascaline calculator में error देखे।  तो उनके मन में बेहतर और macanical Calculator बनाने का ख्याल आया।  फिर क्या था ? Charless babbage ने pascaline से प्रेरणा लेकर सन 1822 ई0 में पहला mechanical calcutaor का अविष्कार किया।  जिसे Differencial Engine का नाम दिया गया तथा उन्होंने और भी engine बनाये जैसे Analytical Engine जो गणनाओ को सही तरह से करते थे।  

Difference Engine में गिअर और Soft लगे थे। ये Engine भाप से चलते थे। ये बहुत ही शक्तिशाली Calculator थे।  उन्होंने सन 1937 ई० स्वचालित  Computer develop करने की परिकल्पना की थी।  लेकिन धन की कमी के कारण वे उसे पूरा नहीं कर पाए।  लेकिन आज के computer उनकी परिकल्पना के आधार पे ही बनाये गए है।  इसलिए Charles babbage को computer का जनक कहा जाता है। 

Characteristics of Computer in Hindi

अब जानेगे Computer की विशेषताएं ( Characteristics of Computer in Hindi ) कितनी है | 

मुख्य: रूप से Computer की 6 विशेषताएं है।  जिनकी list नीचे दी गयी है। 
1. Speed
2. Storage
3. Accuracy
4. Versatility
5. Automation
6. Reliability

हमने इन सभी Computer की विशेषताओ की जानकारी पहले ही पूरी तरह से share कर रखी है।  इसे जानने के लिए नीचे दी गयी link से पढ़ सकते है।  

Types of Computer in Hindi

अब हम जानेंगे Computer कितने प्रकार के है और इनमे कौन-से computer है।  इन Computer के क्या काम है।Computer को मुख्य रूप से तीन भागो में बांटा गया है।  

1. कार्य प्रणाली के आधार पर ( Based on Mechanism)
2. आकार के आधार पर ( Based on Size )
3. उद्देश्य के आधार पर (Based on Purpose)

कार्य प्रणाली के आधार पर 

कार्य प्रणाली के आधार पर भी Computer को तीन भागो में विभाजित किया गया है।  जिनमे अलग अलग काम करने वाले Computer शामिल है। 

1. Analog Computer 
2. Digital Computer
3. Hybrid Computer

Analog Computer 

भौतिक मापन के क्षेत्र में प्रयोग किया जाने वाला computer Analog Computer कहलाता है।  यह Computer विद्युत् संकेतो की आपूर्ति पर काम करता है। 

Digital Computer

जिस computer के द्वारा अंको की गणना की जाती है।  Digital Computer कहलाता है।  इसमें दो digit होते है 0 और 1 ये Computer Binary Number का use करते है। 

Hybrid Computer

ऐसे Computer जिनमें Analog Computer तथा Digital Computer दोनों के features शामिल होते है।  Hybrid Computer कहलाते है। 

आकार के आधार पर 

आकार के आधार पर Computer को मुख्य रूप से पॉँच भागो में विभाजित किया गया है।  

1. Micro Computer
2. Mini Computer
3. Mainframe Computer
4. Super Computer
5. Desktop Computer

Micro Computer

वह computer को सबसे छोटे आकार में होते है।  Micro Computer कहलाते है।  यानि आज के जो Personal Computer use किये जाते है।  वे Micro Computer है।  इनमे एक Microprocessor होता है।  सबसे पहला Micro Computer 8-Bit Microrocessor Chips का बना था। उसके बाद Improvement होते होते आज 8-bit, 32-bit, 64-bit के Micro Computer available है। Example- IBM PC, PC-AT

Mini Computer 

ये Computer एक समय में एक से अधिक User Support कर सकता है।  इनमे Storage Capacity काफी अधिक होती है।  इसलिए ये काफी अधिक तेजी से कार्य करते है। ये Computer Multi-user Operating System को Use करते है।  इन Computer का आकार Micro Computer और Main Frame Computer के बीच में होता है। 

Mainframe Computer

इन Computer का आकार Micro Computer और Mini Computer से बड़ा होता है।  ये computer कई Operating system चला सकते है।  इनकी Storage Speed काफी अधिक होती है।  इन computer को Banks, Insurance आदि में Use किया जाता है।  जहा बहुत सी transaction process होती है।  ये computer hundreds transaction को Second में process कर देते है तथा ये Megabytes Terabytes आदि data को process करने में सक्षम है। 

Super Computer

ये बहुत ही बड़े आकार के computer होते है।  ये Computer 100 से अधिक Microprocessor को जोड़ कर बनाये जाते है।  इनका Use मौसम विभाग, Biomedical Research, Aircraft Design, Remote sensing आदि कार्य में होता है। 

Desktop Computer

ये Computer shops आदि में use किये जाते है|

उद्देस्य के आधार पर 

इसके आधार पर computer को दो भागो में विभाजित किया गया है।  
1. General Purpose
2. Special Purpose 

General Purpose

वह computer जो सामान्यता विभिन्न प्रकार के काम कर सकता है General Purpose Computer कहलाता है। 

Special Purpose

इन Computer में General Purpose Computer से अधिक क्षमता होती है. इनके CPU अधिक शल्तिशाली होते है। 

यहाँ पे हमने Types of computer In Hindi की पूरी जानकारी दी है।  लेकिन अगर आप इसे और अधिक गहराई से जानना चाहते है. तो आप नीचे दी गयी Link से Read कर सकते है। 

Generation of Computer in Hindi

जैसे की हम जानते है।  Computer का अविष्कार बहुत पहले हुआ था।  और आज तक Computer में परिवर्तन होता रहा है।  जैसे - उनके आकार में,  क्षमता में, स्क्रीन में , Data Processing आदि में।
इसलिए कम्प्यूटर्स को पीढ़ियो में वर्गीकृत किया गया है।  जिन्हे Generation of Computer in hindi के नाम से जानते है। Computer को मुख्य रूप से 5 पीढ़ियो में विभाजित किया गया है। 

1. पहली पीढ़ी के Computer ( 1940- 1956)
2. दूसरी पीढ़ी के Computer 
3. तीसरी पीड़ी के Computer
4. चौथी पीड़ी के Computer
5. पांचवी पीड़ी के Computer

पहली पीढ़ी के Computer

पहली पीढ़ी के Computer ( First Generation of Computer ) का समय 1946 - 1959 तक रहा है।  इन Computer में Vacuum Tubes का प्रयोग होता था।  Vacuum Tubes एक कांच का टुकड़ा होता था।  जिसके आज के समय में bulb है।  इन Vacuum Tubes में Electron प्रवाह की गति को नियत्रित करने के लिए electrod का प्रयोग किया जाता था।  यह electronic signal को नियत्रित और बढ़ा भी सकता था।  

1. ये Computer बहुत अधिक वजन के होते थे। 
2. इनकी Cost बहुत ज्यादा होती थी। 
3. इन Computer में Binary language का प्रयोग किया गया था। 
4. इन Computer को चलाने पर ये बहुत अधिक heat होते थे।  इसलिए AC की आवश्यकता होती थी।  
5. ये बहुत ही धीमी गति से चलते थे। 

पहली पीढ़ी का Computer ENIAC बना था।  इसका पूरा  नाम  ( इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटेड एंड कंप्यूटर) था।  इस Computer का अविष्कार जे . प्रेस्पर एकर्ट और john William Mauchly ने पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में किया था।  

यह बहुत ही बड़े आकार का Computer था।  इसलिए इसको एक कमरे में set किया गया था और यह computer पूरे कमरे में आ पाया था।  यह लगभग 40 - 50 फिट लम्बा था।  इसका वजन 30 टन था, इसमें 18000 vacuum tubes , 70000 रजिस्टर , 10000 कैपेसिटर लगे हुए थे।  इसके अतिरिक्त अन्य और पहली पीढ़ी के Computer है।  Example -- ENIAC, EDVAC, और UNIVAC

दूसरी पीढ़ी के Computer

दूसरी पीढ़ी के computer का समय 1956 से 1963 तक रहा है।  इस पीढ़ी के computer को ट्रांज़िस्टर का उपयोग करके बनाया गया था।  ट्रांजिस्टर के बने computer vacuum tubes से बने computer से बेहतर थे।  ये Computer आकार में छोटे, काम ऊर्जा ग्रहण करने वाले , तेज चलने वाले थे तथा इनकी कीमत भी काम थी।  इन computer का इस्तेमाल काफी अधिक किया जाने लगा था।  

दूसरी पीढ़ी के Computer में programming करना संभव था।  ये Computer high level language जैसे - Fortran, Cobol, Algol, Snobal आदि का प्रयोग करते थे।  

उदाहरण 

1. IBM 7094
2. Honey Well 400
3. UNIVAC 1108
4. CDC 1604
5. CDC 3600


तीसरी पीढ़ी के Computer

तीसरी पीढ़ी के Computer की शुरुआत सन 1964 में हुई तथा 1971 तक रही।  इस पीढ़ी के Computer में  Integrated Circuit ( IC ) का प्रयोग किया गया था।  इन Computer का आकार पहली पीढ़ी के computer तथा दूसरी पीढ़ी के computer से छोटा था।  अब ये काफी बेहतर बन चुके थे और इनकी क्षमता , Speed भी अच्छी थी।  इनको किसी भी काम को करने के लिए आसानी से Use किया जा सकता था।  

Integrated Circuite का अविष्कार Texas Instruments Company में Jack Kilby ने किया था।  

 उदाहरण

1. ICL 2903
2. ICL 1900
3. UNIVAC 1108
4. System 1360

चौथी पीढ़ी के Computer 

चतुर्थ पीढ़ी के Computer का समय 1971 से 1985 तक रहा है।  इस पीढ़ी के Computer में Integrated Circuit के द्वारा Very Large Scale Integrated Circuit (VLSIC ) बनाया गया जिससे Microprocessor बना। Microprocessor बनने के बाद Computer क्षेत्र में क्रांति सी आ गयी।  सभी Computer में Microprocessor का use किया जाने लगा।  Microprocessor से Micro Computer का जन्म हुआ।  जिससे उनकी आकार आकृति में काफी बेहतर परिवर्तन हो पाया।  अब Computer इतने छोटे हो चुके थे।  की उनको कही भी किसी जगह Use किया जा सकता था।  छोटे Computer बनने के कारण उनकी Price भी काफी काम हो चुकी थी।  आज भी  Microprocessor Technology के Computer आ रहे है।  

इसी समय C भाषा बनी।  C Programming language से Computer में Scientist के आलावा आम आदमी भी Programming कर सकता था।  इसी समय में GUI (Graphical User Interface ) Operating System बने।  

MITS Company द्वारा पहला Micro Computer ALTAIR 800 बना था।  आज के Computer भी इसी Technology Microprocessor पर आधारित है।  

पांचवी पीढ़ी के Computer 

सन 1985 से पांचवी पीढ़ी के Computer की शुरुआत हुई और वर्त्तमान में पांचवी पीढ़ी ही चल रही है आगे भी चलती रहेगी।  इन Computer में Very Large Scale Integrated Circuit (VLSIC ) की जगह Ultra Large Scale Integrated Circuit  ( ULSIC ) का प्रयोग किया गया।   

इस Technology के द्वारा बने Microprocessor अधिक शक्तिशाली है।  उनकी कार्य करने की क्षमता में काफी अधिक बृद्धि हुई तथा इन Computer में ( Artificial Intelligence ) का प्रयोग कर उन्हें बुद्धीमान बनाने का प्रयास किया जा रहा है।  इसके आलावा artificial Intelligent के कई feature इन Computer में मौजूद भी है।  जैसे - Voice System, ATM Machine, Image Control आदि 

Computer Organization in Hindi

Computer के आकार, आकृति उसकी Performance तथा लागत में प्रत्येक समय से ही परिवर्तन होता रहा है।  लेकिन Von Neuman के अनुसार Computer को किसी विशेष कार्य करने के लिए 5 Operation पर perform करना होता है।  जो कभी बदले नहीं और न ही बदल सकते है।  इसकी को Computer Organization कहा जाता है।  

1. Inputting
2. Storing
3. Processing
4. Outputting 
5. Controlling

Inputting

Computer System में Data Enter करने तथा Computer System को निर्देश देने की प्रक्रिया Inputting कहलाती है। 

Storing

Computer System में Data को Save करने तथा आवश्यकता अनुसार जल्दी से उपलब्ध कराने या Data को  निकालने की प्रक्रिया Storing कहलाती है।   

Processing 

अंकगणितय Operation करने की प्रक्रिया Processing कहलाती है।  जैसे - जोड़ना , घटाना, भाग, गुणा, तुलना करना ये सब Data को Useful Information में Convert करने के लिए होते है।  

Outputting 

उपयोगकर्ता को उपयोगी जानकारी या Result देने की प्रक्रिया Outputting कहलाती है।  जैसे - Printed Report, Visual Display

Controlling 

सभी Operation करने तथा निर्देश देने की प्रक्रिया |

Primary Storage क्या है 

Computer की main memory Primary Storage कहलाती है।  जो Data Program और Instruction रखता है।  जिस प्रकार मानव को कुछ भी याद रखने के लिए दिमाग होता है।  उसी प्रकार Primary memory Computer का दिमाग होता है।  इसमें उपलब्ध Data को Computer बहुत fast तरीके से access करता है।  लेकिन जब तक Computer On रहता है।  तब तक इसके Data को access किया जा सकता है। 

Secondary Storage क्या है 

Secondary Storage वह memory कहलाती है, जिस Memory में Data को Load करके यानि इकठा करके रखा जाता है। इसको बाहर से Computer में जोड़ कर Use किया जाता है।  तभी हम इसके Data को Access कर सकते है।  यह एक Permanent Data होता है।  लेकिन ये थोड़ा धीमे काम करता है।  

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